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World famous astrologer and best astrologer in india
     Ashok Bhargav

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           ABOUT BEST ASTROLOGER ASHOK BHARGAV JI

 

पिता गुरु स्वर्गीय श्री श्रद्धा नन्द जी महाराज और माता घेवरी देवी गौड़ भार्गव जी के तीन पुत्रों में सबसे ज्येष्ठ पुत्र हैं परम पूज्यनीय गुरु पंडित श्री अशोक कुमार गौड़ भार्गव।

ज्योतिषी घर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषी परिवार के अंतर्गत आता है। पिछले 4 दशकों से वे सबसे उत्कृष्ठ और आसान उपायों द्वारा सभी की समस्याओं का समाधान करते आ रहे हैं। ज्योतिषी परिवार की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए उसका प्रतिनिधित्व करते हुए गुरु जी अपने ज्ञान के प्रकाश से लोगों की जिंदगी में उजाला कर रहे हैं।

स्वर्गीय श्री श्रद्धा नन्द महाराज जी का जन्म राजस्थान के फतहेपुर शेखाबाटी जिला सीकर राजस्थान में हुआ था। इनके पिता श्री स्वर्गीय बिहारी लाल गौड़ और माता का नाम श्रीमती जुगली देवी गौड़ था। श्री श्रद्धा नन्द महाराज जी बड़े पुत्र थे। इनके पिता जी दो भाई थे श्री बाबूलाल गौड़ और स्वर्गीय बिहारी लाल गौड़ जी। श्री श्रद्धा नन्द महाराज जी को बचपन से ही भगवा भेष मैं रहना और धार्मिक ज्ञान हासिल करने में रुचि थी। श्री श्रद्धा नन्द महाराज जी एक मंदिर, जिसका नाम श्री भार्गव शक्ति मंदिर, फतहेपुर शेखावाजिला सीकर राजस्थान में स्थित है। वहां मात्र 70 रुपए महीने में सेवा किया करते थे और जब इनको 70 रूपए मिलते थे तो सही दिन इनके पास बहुत से साधु संत आ जाया करते थे और सभी मिल कर सत्संग किया करते थे, जहां सभी संत भोजन करते थे अपने 70 रूपए को साधु — संतो में खर्च कर देते थे। श्री श्रद्धा नन्द महाराज जी का पूरा जीवन पूजा पाठ और धर्म प्रचार में ही व्यतीत हुआ।

श्री श्रद्धा नन्द महाराज जी ने अपना संपूर्ण जीवन सादगी से व्यतीत किया। उनका मकसद था, सभी की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना।

श्री श्रद्धा नंद जी महाराज ने अपने बड़े बेटे पंडित अशोक कुमार गौड़ भागर्व जी को लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए अपने प्राचीन ज्योतिष का ज्ञान दिया। दोनों ने कई वर्षों तक एक साथ मिलकर असंख्य लोगों को सही रास्ता दिखाने का काम किया। विश्व कल्याण में श्री श्रद्धा नंद जी महाराज ने 1984 में बड़े बेटे पंडित अशोक कुमार गौड़ भार्गव जी को नई दिल्ली में अपनी नई शाखा खोलने का मंत्र दिया, जिसे उन्हें पिता की आज्ञा मान स्वीकार करने का निर्णय लिया। 1 अप्रैल 2011 को स्वर्गीय श्री श्रद्धा नंद जी महाराज ने समाधि ग्रहण की।

आज अपने पिता द्वारा मिले मार्गदर्शन और परम्परा को आगे बढ़ाते हुए पंडित अशोक कुमार गौड़ भार्गव जी सप्ताह के अपने 7 दिन पूरी सच्ची लगन से दोनों कार्यालयों में लोगों की सेवा कर रहे हैं। नई दिल्ली स्थित श्री भार्गव ज्योतिष संस्थान, इसी कड़ी में पंडित अशोक कुमार गौड़ भार्गव जी द्वारा किया गया अनूठा प्रयास है। गुरु जी द्वारा लोगों की सर्पिल और हस्तरेखा शास्त्र पढ़ने के बाद वह 100% सही फिट भविष्यवाणी करते हैं, जिसके द्वारा आज उनके पास असंख्य अनुयायी हैं, जो उन पर पूरा विश्वास जताते हैं और गुरु जी की तरफ अपनी सभी समस्याओं के एकमात्र समाधान स्थान की तरह देखते हैं।

उपरोक्त समस्याओं के अतिरिक्त किसी भी अन्य समस्या या दोष जैसे कि पितृ दोष, मांगलिक दोष, काल सर्प दोष, गंड मूल दोष आदि के निवारण करने में भी गुरु पंडित अशोक कुमार गौड़ भार्गव जी को दिव्य ज्ञान प्राप्त है।

इस परिवार के स्तंभ पंडित रामू जी, जिनका नाम कोहादाशकोट के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने ऋषिकेश, उत्तराखंड में ज्योतिष का अपना अध्ययन पूरा किया था। उनका अनुमान है कि ज्योतिष हमेशा वह सटीक है, जो लोगों के मन को पढ़कर उन्हें सरल उपाय दे सके। यहीं कारण था कि पंडित रामू जी को लोगों का भविष्य पढ़ने में दिव्य दृष्टि प्राप्त रही, जिस कारण उन्होंने लोगों के भूत, वर्तमान और भविष्य का सटीक आंकलन किया,जिसने उन्हें ऋषिकेश उतराखंड ही नहीं अपितु दूर दराज के शहरों में भी विश्वप्रसिद्धि दिलाने का काम किया।

कुछ ही वर्षों में वह एक बहुत ही लोकप्रिय ज्योतिषी बन गए हैं और उनकी लोकप्रियता राजस्थान में जयपुर के शाही परिवार में देखी जाती है। शाही परिवार द्वारा मिले सम्मानपूर्वक निमंत्रण के बाद वह परिवार के साथ जयपुर में बस गए और अपने अलौकिक ज्ञान से उनकी सेवा की।

जयपुर में कुछ समय बिताने के बाद पंडित रामू जी ने भारत के दूसरे राज्यों का दौरा शुरू कर दिया और ज्योतिष के बारे में लोगों को जागरुक करने का काम किया। अपने काम के कारण अत्यधिक लोगों और अन्य राज्यों में सम्मानित समितियों द्वारा उन्हें प्रशंसा भी प्राप्त हुई।

वह अपने बड़े बेटे पंडित बिहारी लाल के साथ ज्योतिषीय विधियों द्वारा समाज के कल्याण के लिए हमेशा से कृत संकल्प रहे हैं। समय के परिवर्तन के साथ वे अपने पूरे परिवार के साथ अमृतसर, पंजाब में स्थानांतरित हुए। यहाँ उन्होंने 20 साल तक ध्यान साधना की। वहाँ उनकी स्मृति में एक पवित्र श्री शनिदेव मंदिर है। 1761 में उन्होंने स्थायी रूप से अपनी पहली कार्यालय जगदंबा ज्योतिष केन्द्र की नींव रखी, जहां आज उसकी 3 पीढ़ी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ अपने प्राचीन ज्योतिष के साथ लोगों की सेवा कर रही है।

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